🤔 कुछ पल ऐसे आते हैं कि हम समझ के भी उस पल के नजाकत को नहीं समझ पाते। हमारा मन मस्तिष्क शून्य की ओर जाने लगता है, हालांकि यह मात्र एक भ्रम है क्योंकि जब हम यह विचार कर पा रहे हैं कि मन मस्तिष्क शून्य की ओर जा रहा है अर्थात् विचार की शक्ति क्षीण प्रतीत हो रही है, तो हम वहां शून्य नहीं हैं। मन की अस्थिरता.......✍
🤔कभी कभी मन इस प्रकार विचलित होता है कि संभलना एक युद्ध स्तर का कार्य लगता है, जब संभलना भी अनिवार्य होता है। विचलित मन .....
🤔एक ऐसी परिस्थिति आती है कि हम ही अपराधी और हम ही अधिवक्ता भी , शर्त यह होती है कि विधि निर्णायक का स्थान विधाता को ही समर्पित होता है। प्रतिनिर्णायक स्थिति
📖संदर्भित ; किसी में आसक्त होना और उसी को इससे अनासक्त करना कितना अद्भुत परीक्षण है न अपना।
🫀क्या होगा जब आपको पता हो आपका परिवार आपके कारण सामान्य से निम्न की ओर होता हुआ दिखाई दे और आप एक प्रकार से विवश हों? आपको अपने से श्रेष्ठ पर( जैसे पिता) विश्वास बनाए रखना होगा। और अपने आप को प्रबल करने का अधिकाधिक प्रयास करना होगा। एक परिवारिक धर्मसंकट स्थिति